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Life & Adhyatam
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6/19/25

मौन की शक्ति क्या है? | The Power of Silence & Speaking Wisely

हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं, जहाँ लोग दिनभर बोलते रहते हैं – सोशल मीडिया, बातचीत, कॉल, मीटिंग और फिर भी शांति नहीं मिलती। पर क्या कभी आपने सोचा है कि जो लोग कम बोलते हैं, वे ज़्यादा बुद्धिमान क्यों माने जाते हैं?

"मौन केवल चुप रहने का नाम नहीं है। यह आत्म-नियंत्रण, विचारों की शुद्धता और आंतरिक शांति की अभिव्यक्ति है।"

हमने जीवन में देखा होगा कि कुछ लोग बहुत कम बोलते हैं। वे केवल ज़रूरत और सार्थक बातों पर ही अपना वक्तव्य देते हैं। उनकी बातचीत में एक गंभीरता होती है, एक उद्देश्य होता है। ऐसे लोग अक्सर अपने कार्यों में लगे रहते हैं, और उनका जीवन व्यवस्थित, शांत और सफल दिखता है।

4/18/25

मन का मनका फेर: कबीर के दोहे में छिपा आत्म-साधना का संदेश

Religious World: मन का मनका फेर: कबीर के दोहे में छिपा आत्म-साधना क...


कबीर का दोहा:

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥

यह दोहा संत कबीर की अद्भुत आध्यात्मिक गहराई और व्यावहारिक सोच का परिचायक है। कबीर दास जी इस दोहे के माध्यम से धर्म के बाह्य आडंबरों पर कटाक्ष करते हुए सच्ची साधना की ओर संकेत कर रहे हैं।

1/27/25

जाने मन के प्रकार हैं और मन के बारे में सूक्ष्म ज्ञान

 जाने मन के कितने प्रकार हैं

 मन के निम्न  प्रकार हैं:

1. चेतन मन यानि (Conscious Mind) (यह मन के वर्तमान स्थिति या ऊपरी व्यवहार केस्थिति होता है)

2. अवचेतन मन  यानि (Subconscious Mind) 

3. सचेतन मन  यानि (Active conscious mind)

4. अचेतन मन  यानि (Unconscious Mind)

‌‌‌5. अतिचेतन  यानि (Super Conscious Mind)

6. सामूहिक चेतन मन  यानि (Collective Conscious Mind)

7. स्वाभाविक मन  यानि (Spontaneous Mind)

8. परम मन  यानि (Ultimate Mind)

1/5/25

Religious World: आध्यात्मिकता के ज्ञान से जाने रोग तथा व्याधि का मनोवैज्ञानिक पहलू

Religious World: आध्यात्मिकता के ज्ञान से जाने रोग तथा व्याधि का मन...
आध्यात्मिकता के ज्ञान से जाने रोग तथा व्याधि का मनोवैज्ञानिक पहलू

मनुष्य का मन जगत नियन्ता का एक अद्भुत आश्चर्य है, वही समस्त जड़ चेतन का कारण भूत है तथा मानव जीवन के समग्र पहलू प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से ही उसी एक केन्द्र के इर्द-गिर्द चक्कर लगा रहे हैं। मनुष्य का अस्तित्व मानसिक संघर्ष से हुआ है, उसके विचारों ने उसका पंच भौतिक शरीर विनिर्मित किया है। अपनी मानसिक अवस्था के कारण प्रत्येक व्यक्ति अपनी बेड़ियाँ दृढ़ करता है तथा अज्ञान तिमिर में आच्छन्न हो ठोकरें खाता फिरता है।