सच्ची इबादत क्या है? – सेवा और कर्म का प्रेरणादायक संदेश
बहुत समय पहले एक धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक रहते थे। वे नियमित रूप से प्रार्थना करते, लोगों की सहायता करते और ईश्वर के प्रति गहरी श्रद्धा रखते थे। फिर भी उनके मन में एक प्रश्न था—क्या केवल पूजा-पाठ ही ईश्वर को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम मार्ग है?
एक दिन ध्यानावस्था में उन्होंने एक दिव्य दूत की कल्पना की, जिसके हाथ में एक विशाल पुस्तक थी। जिज्ञासावश उन्होंने पूछा,
"इस पुस्तक में क्या लिखा है?"
दूत ने उत्तर दिया,
"इसमें उन लोगों के नाम हैं जो ईश्वर की आराधना करते हैं।"
उन्होंने उत्सुकता से अपना नाम खोजने को कहा। पूरी पुस्तक देखने के बाद भी उनका नाम उसमें नहीं मिला। यह देखकर उन्हें आश्चर्य और निराशा दोनों हुई।