क्या आधुनिक पुरस्कार-आधारित शिक्षा भ्रष्टाचार की मनोवैज्ञानिक जड़ है?
गुरुकुल से किंडरगार्टन तक: शिक्षा, संस्कार और भ्रष्टाचार पर एक वैचारिक विमर्श
भ्रष्टाचार पर वर्षों से चर्चा होती रही है। इसके कारणों में गरीबी, लालच, कमजोर कानून, राजनीतिक हस्तक्षेप, प्रशासनिक शिथिलता, सामाजिक असमानता और नैतिक पतन जैसे अनेक कारण गिनाए जाते हैं। किंतु मेरा मानना है कि इन सबके पीछे एक ऐसा कारण भी हो सकता है, जिस पर अपेक्षित गंभीरता से विचार नहीं किया गया है—प्रारंभिक शिक्षा प्रणाली।
यह लेख किसी स्थापित निष्कर्ष का दावा नहीं करता। यह एक मौलिक वैचारिक परिकल्पना है, जिसे मैं शिक्षा-शास्त्रियों, मनोवैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियों, दार्शनिकों और नीति-निर्माताओं के विचारार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ।