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1/19/26

सफल लोग अपने 24 घंटे ऐसे इस्तेमाल करते हैं जो आम लोग कभी नहीं करते

 नमस्कार दोस्तों,

आज का यह वीडियो सिर्फ प्रेरणा देने के लिए नहीं है,
बल्कि आपकी सोच, आपकी दिनचर्या और आपके भविष्य को बदलने के लिए है।

क्या आपने कभी सोचा है —
कि दुनिया के हर इंसान को
चाहे वह गरीब हो या अमीर,
सफल हो या असफल,
दिन में सिर्फ और सिर्फ 24 घंटे ही मिलते हैं?

और फिर भी…
कुछ लोग इतिहास बनाते हैं
और कुछ लोग सिर्फ शिकायतें।

आज हम बात करेंगे —

कि सफल लोग अपने 24 घंटे ऐसे कैसे जीते हैं, जो आम लोग कभी नहीं जी पाते।

12/26/25

क्या स्त्री आज भी अन्नपूर्णा और गृहलक्ष्मी है?


हम अक्सर गर्व से कहते हैं कि भारतीय संस्कृति में स्त्री को देवी का स्थान दिया गया है। उसे अन्नपूर्णा कहा गया, गृहलक्ष्मी कहा गया। ये शब्द सुनने में जितने सुंदर हैं, उतने ही भारी भी। क्योंकि इनके साथ अपेक्षाएँ जुड़ी हैं — ऐसी अपेक्षाएँ जो समय के साथ बदली नहीं, बल्कि और जटिल होती चली गईं।

12/20/25

भिखारी मुक्त भारत अभियान : जीवन संकल्प केंद्र — भिक्षा से आत्मनिर्भरता तक

भारत में भिक्षावृत्ति अब केवल गरीबी की समस्या नहीं रह गई है। यह मानसिक बीमारी, शारीरिक अक्षमता, सामाजिक बहिष्कार, मानव तस्करी, बच्चों के शोषण और संगठित गिरोहों से जुड़ा एक जटिल सामाजिक संकट बन चुकी है। ऐसे में भिक्षावृत्ति को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानकर समाप्त नहीं किया जा सकता। आवश्यकता है एक ऐसे मानवीय और व्यावहारिक समाधान की, जो भिखारी को समस्या नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी माने।

“जीवन संकल्प केंद्र” इसी दृष्टि से प्रस्तावित एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति को हटाना नहीं, बल्कि भिखारी को सम्मानपूर्वक जीवन की मुख्यधारा में लौटाना है।

5/16/25

मन की शांति पाने के 10 गहरे और प्रभावशाली उपाय

 क्या सच में मन की शांति संभव है?


आज की भागदौड़ और तनाव भरी ज़िंदगी में मन की शांति मानो एक दुर्लभ खजाना बन गई है।
काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ, सोशल मीडिया की लत और लगातार सोचते रहने की आदत — ये सभी हमें भीतर से अस्थिर कर देते हैं।

लेकिन क्या मन की शांति पाना वाकई इतना कठिन है?
बिलकुल नहीं।
असल में शांति कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही छिपी होती है।
ज़रूरत है सिर्फ कुछ सरल लेकिन गहरे बदलावों की।

5/9/23

मांस का मूल्य

मगध सम्राट बिंन्दुसार ने एक बार अपनी सभा मे पूछा : देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए *सबसे सस्ती वस्तु क्या है ?*

मंत्री परिषद् तथा अन्य सदस्य सोच में पड़ गये ! चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा आदि तो बहुत श्रम के बाद मिलते हैं और वह भी तब, जब प्रकृति का प्रकोप न हो, ऎसी हालत में अन्न तो सस्ता हो ही नहीं सकता !

तब शिकार का शौक पालने वाले एक सामंत ने कहा :

राजन,

*सबसे सस्ता खाद्य पदार्थ मांस है,*

इसे पाने मे मेहनत कम लगती है और पौष्टिक वस्तु खाने को मिल जाती है । सभी ने इस बात का समर्थन किया, लेकिन प्रधान मंत्री चाणक्य चुप थे ।

तब सम्राट ने उनसे पूछा : आपका इस बारे में क्या मत है ?

चाणक्य ने कहा : मैं अपने विचार कल आपके समक्ष रखूंगा !

10/10/15

पहली बार मुझे मेरी ईमानदारी का इनाम मिला था !!......




इस साल मेरा सात वर्षीय बेटा दूसरी कक्षा मैं प्रवेश पा गया!! क्लास मैं हमेशा से अव्वल आता रहा है!





पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो…  मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले गया !

बेटे ने जूते लेने से ये कह कर मना कर दिया की पुराने जूतों को बस थोड़ी-सी मरम्मत की जरुरत है

वो अभी इस साल काम दे सकते हैं!




अपने जूतों की बजाये उसने मुझे अपने दादा की कमजोर हो चुकी नज़र के लिए नया चश्मा बनवाने को कहा !

मैंने सोचा बेटा अपने दादा से शायद बहुत प्यार करता है इसलिए अपने जूतों की बजाय उनके चश्मे को ज्यादा

जरूरी समझ रहा है ! खैर मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर ड्रेस की दुकान पर पहुंचा…..


दुकानदार ने बेटे के साइज़ की सफ़ेद शर्ट निकाली … डाल कर देखने पर शर्ट एक दम फिट थी….. फिर भी बेटे ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा !!!!




मैंने बेटे से कहा : बेटा ये शर्ट तुम्हें बिल्कुल सही है तो फिर और लम्बी क्यों ?

बेटे ने कहा :पिता जी मुझे शर्ट निक्कर के अंदर ही डालनी होती है इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा……. लेकिन यही शर्ट मुझे अगली क्लास में भी काम आ जाएगी ……

पिछली वाली शर्ट भी अभी नयी जैसी ही पड़ी है लेकिन छोटी होने की वजह से मैं उसे पहन नहीं पा रहा !

मैं खामोश रहा !!

घर आते वक़्त मैंने बेटे से पूछा : तुम्हे ये सब बातें कौन सिखाता है बेटा ?

बेटे ने कहा: पिता जी मैं अक्सर देखता था कि कभी माँ अपनी साडी छोड़कर तो कभी आप अपने जूतों को छोडकर हमेशा मेरी किताबों और कपड़ो पैर पैसे खर्च कर दिया करते हैं !

गली- मोहल्ले में सब लोग कहते हैं के आप बहुत ईमानदार आदमी हैं!

और हमारे साथ वाले राजू के पापा को सब लोग चोर, कुत्ता, बे-ईमान, रिश्वतखोर और जाने क्या क्या कहते हैं,

जबकि आप दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं…..

जब सब लोग आपकी तारीफ करते हैं तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है…..

मम्मी और दादा जी भी आपकी तारीफ करते हैं ! पिता जी मैं चाहता हूँ कि….

मुझे कभी जीवन में नए कपडे, नए जूते मिले या न मिले

लेकिन कोई आपको चोर, बे-ईमान, रिश्वतखोर या कुत्ता न कहे !!!!!

मैं आपकी ताक़त बनना चाहता हूँ पिता जी, आपकी कमजोरी नहीं !

बेटे की बात सुनकर मैं निरुतर था! आज मुझे पहली बार मुझे मेरी ईमानदारी का इनाम मिला था !!

आज बहुत दिनों बाद आँखों में ख़ुशी, गर्व और सम्मान के आंसू थे…!!


9/29/15

संतरे बेचती बूढ़ी औरत.....








एक डलिया में संतरे बेचती बूढ़ी औरत से एक युवा अक्सर संतरे खरीदता ।





अक्सर, खरीदे संतरों से एक संतरा निकाल उसकी एक फाँक चखता और कहता, "ये कम मीठा लग रहा है, देखो !" बूढ़ी औरत संतरे को चखती और प्रतिवाद करती "ना बाबू मीठा तो है!"





वो उस संतरे को वही छोड़, बाकी संतरे ले गर्दन झटकते आगे बढ़ जाता।





युवा अक्सर अपनी पत्नी के साथ होता था, एक दिन पत्नी नें पूछा "ये संतरे हमेशा मीठे ही होते हैं, पर यह नौटंकी तुम हमेशा क्यों करते हो ?"





युवा ने पत्नी को एक मघुर मुस्कान के साथ बताया "वो बूढ़ी माँ संतरे बहुत मीठे बेचती है, पर खुद कभी नहीं खाती, इस तरह उसे मै संतरे खिला देता हूँ ।





एक दिन, बूढ़ी माँ से, उसके पड़ोस में सब्जी बेचनें वाली औरत ने सवाल किया, ये झक्की लड़का संतरे लेते इतनी चख चख करता है, पर संतरे तौलते मै तेरे पलड़े देखती हूँ, तू हमेशा उसकी चख चख में, उसे जादा संतरे तौल देती है ।





बूढ़ी माँ नें साथ सब्जी बेचने वाली से कहा "उसकी चख चख संतरे के लिए नहीं, मुझे संतरा खिलानें को लेकर होती है, वो समझता है में उसकी बात समझती नही,मै बस उसका प्रेम देखती हूँ, पलड़ो पर संतरे अपनें आप बढ़ जाते हैं ।





SOURCE - FACEBOOK


7/5/15









माँ ने एक शाम दिनभर की लम्बी थकान एवं काम के बाद जब डिनर बनाया तो उन्होंने पापा के सामने एक प्लेट सब्जी और एक जली हुई रोटी परोसी।





मूझे लग रहा था कि इस जली हुई रोटी पर पापा कुछ कहेंगे, परन्तु पापा ने उस रोटी को आराम से खा लिया।





हालांकि मैंने माँ को पापा से उस जली रोटी के लिए "साॅरी" बोलते हुए जरूर सुना था।





और मैं ये कभी नहीं भूल सकता जो पापा ने कहा: "मूझे जली हुई कड़क रोटी बेहद पसंद हैं।"





देर रात को मैंने पापा से पूछा, क्या उन्हें सचमुच जली रोटी पसंद हैं?





उन्होंने कहा- "तुम्हारी माँ ने आज दिनभर ढ़ेर सारा काम किया, ओर वो सचमुच बहुत थकी हुई थी।





और वैसे भी एक जली रोटी किसी को ठेस नहीं पहुंचाती परन्तु कठोर-कटू शब्द जरूर पहुंचाते हैं।





तुम्हें पता है बेटा - "जिंदगी भरी पड़ी है अपूर्ण चीजों से...अपूर्ण लोगों से... कमियों से...दोषों से...





मैं स्वयं सर्वश्रेष्ठ नहीं, साधारण हूँ , और शायद ही किसी काम में ठीक हूँ।





मैंने इतने सालों में सीखा है कि "एक दूसरे की गलतियों को स्वीकार करना... 


नजरंदाज करना... 


आपसी संबंधों को सेलिब्रेट करना।"





मित्रों, जिदंगी बहुत छोटी है...


उसे हर सुबह-शाम दु:ख...पछतावे...


खेद में बर्बाद न करें।





जो लोग तुमसे अच्छा व्यवहार करते हैं, उन्हें प्यार करें और जो नहीं करते उनके लिए दया, सहानुभूति रखें।


SOURCE - FACEBOOK


3/12/15

Inspirational Story - एक डॉक्टर को जैसे ही एक urgent सर्जरी के बारे में फोन करके बताया गया...







एक डॉक्टर को जैसे ही एक urgent सर्जरी के बारे में फोन करके बताया गया . वो जितना जल्दी वहाँ आ सकते थे आ गए. वो तुरंत हि कपडे बदल कर ऑपरेशन थिएटर की और बढे.





डॉक्टर को वहाँ उस लड़के के पिता दिखाई दिए, जिसका इलाज होना था. पिता डॉक्टर को देखते ही भड़क उठे, और चिल्लाने लगे.. "आखिर इतनी देर तक कहाँ थे आप? क्या आपको पता नहीं है की मेरे बच्चे की जिंदगी खतरे में है . क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती.. आप का कोई कर्तव्य है या नहीं ? ”








डॉक्टर ने हलकी सी मुस्कराहट के साथ कहा- “मुझे माफ़ कीजिये, मैं हॉस्पिटल में नहीं था. मुझे जैसे ही पता लगा, जितनी जल्दी हो सका मैं आ गया.. अब आप शांत हो जाइए, गुस्से से कुछ नहीं होगा”








ये सुनकर पिता का गुस्सा और चढ़ गया. भला अपने बेटे की इस नाजुक हालत में वो शांत कैसे रह सकते थे… उन्होंने कहा- “ऐसे समय में दूसरों को संयम रखने का कहना बहुत आसान है. आपको क्या पता की मेरे मन में क्या चल रहा है.. अगर आपका बेटा इस तरह मर रहा होता तो क्या आप इतनी देर करते.. यदि आपका बेटा मर जाए अभी, तो आप शांत रहेगे? कहिये..”








डॉक्टर ने स्थिति को भांपा और कहा- “किसी की मौत और जिंदगी ईश्वर के हाथ में है. हम केवल उसे बचाने का प्रयास कर सकते है.. आप ईश्वर से प्राथना कीजिये.. और मैं अन्दर जाकर ऑपरेशन करता हूँ…” ये कहकर डॉक्टर अंदर चले गए.. करीब 3 घंटो तक ऑपरेशन चला.. लड़के के पिता भी धीरज के साथ बाहर बैठे रहे..








ऑपरेशन के बाद जैसे ही डाक्टर बाहर निकले.. वे मुस्कुराते हुए, सीधे पिता के पास गए.. और उन्हें कहा- “ईश्वर का बहुत ही आशीर्वाद है. आपका बेटा अब ठीक है.. अब आपको जो भी सवाल पूछना हो पीछे आ रही नर्स से पूछ लीजियेगा.. ये कहकर वो जल्दी में चले गए.. उनके बेटे की जान बच गयी इसके लिए वो बहुत खुश तो हुए.. पर जैसे ही नर्स उनके पास आई.. वे बोले.. “ये कैसे डॉक्टर है.. इन्हें किस बात का गुरुर है.. इनके पास हमारे लिए जरा भी समय नहीं है..”








तब नर्स ने उन्हें बताया.. कि ये वही डॉक्टर है जिसके बेटे के साथ आपके बेटे का एक्सीडेँट हो गया था.....


उस दुर्घटना में इनके बेटे की मृत्यु हो गयी.. और हमने जब उन्हें फोन किया गया.. तो वे उसके क्रियाकर्म कर


रहे थे… और सब कुछ जानते हुए भी वो यहाँ आए और आपके बेटे का इलाज किया...





नर्स की बाते सुनकर बाप की आँखो मेँ खामोस आँसू बहने लगे । मित्रो ये होती है इन्सानियत ""


जन्म लिया है तो सिर्फ साँसे मत लीजिये, जीने का शौक भी रखिये.. शमशान ऐसे लोगो की राख से...


भरा पड़ा है..."

Source - FACEBOOK