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Life & Adhyatam
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5/11/18

इंसान में दुसरो कि कमिया देखने की आदत ना होती तो कितना अच्छा होता

"कहते है “दूसरों की कमी निकालने के लिए जब उनकी तरफ हम एक उंगली उठाते है तो ध्यान रहें कि बाकी की चारों उंगलिया हमारी तरफ ही इशारा कर रही होती है”, मतलब साफ़ है कि आप दूसरों की कमिया तभी गिना सकते है जब आप में कोई कमी ना हो, अगर आप में भी कुछ कमियां या बुराइयां है तो आपको ये हक़ बिलकुल नहीं है कि आप दूसरों की कमिया गिनाये। एक बार की बात है,

हमेशा बुराई या कमी ढूंढने वाला व्यक्ति उस मक्खी की तरह होता है, जो शुद्ध और स्वच्छ को छोड़कर गन्दगी में ही रमता है" .

एक बार इंसान ने कोयल से कहा "तू काली ना होती तो कितनी अच्छी दिखती।", सागर से कहा "तेरा पानी खारा ना होता तो कितना अच्छा होता।",गुलाब से कहा "तुझमे कांटे ना होते तो कितना अच्छा होता।", तब तीनो एक साथ बोले कि "इंसान तुझ में दुसरो कि "कमिया" देखने की आदत ना होती तो तू कितना अच्छा होता।" कहने का मतलब है कि “दुनिया में कोई इंसान परिपूर्ण नहीं होता”, हर इंसान में कुछ अच्छाइयां और कुछ बुराइयां होती है, ये अलग बात है कि किसी में अच्छाइयां ज्यादा और बुराइयां कम तो किसी में बुराइयां ज्यादा और अच्छाइयां कम। लेकिन हमें हमेशा लोगो की बुराइयां या कमियों को नजरअंदाज़ करके उसकी अच्छाइयों को देखना चाहिए, क्योंकि उनकी अच्छाइयों को देखकर ही हम अपने आप को और अच्छा बना सकते है। "बुरे लोगो को दुसरे की बुराई में ही मजा आता है"

बहुत समय पहले की बात है।एक बार एक गुरु जी गंगा किनारे स्थित किसी गाँव में अपने शिष्यों के साथ स्नान कर रहे थे। तभी एक राहगीर आया और उनसे पूछा, “महाराज, इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं, दरअसल मैं अपने मौजूदा निवास स्थान से कहीं और जाना चाहता हूँ?” गुरु जी बोले, “जहाँ तुम अभी रहते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं?” ”मत पूछिए महाराज, वहां तो एक से एक कपटी, दुष्ट और बुरे लोग बसे हुए हैं.”, राहगीर बोला। गुरु जी बोले, “इस गाँव में भी बिलकुल उसी तरह के लोग रहते हैं…कपटी, दुष्ट, बुरे…” और इतना सुनकर राहगीर आगे बढ़ गया। कुछ समय बाद एक दूसरा राहगीर वहां से गुजरा।उसने भी गुरु जी से वही प्रश्न पूछा, “मुझे किसी नयी जगह जाना है, क्या आप बता सकते हैं कि इस गाँव में कैसे लोग रहते हैं ?” ”जहाँ तुम अभी निवास करते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं ?”, गुरु जी ने इस राहगीर से भी वही प्रश्न पूछा। “जी वहां तो बड़े सभ्य, सुलझे और अच्छे लोग रहते हैं.”, राहगीर बोला। ”तुम्हे बिलकुल उसी प्रकार के लोग यहाँ भी मिलेंगे…सभ्य, सुलझे और अच्छे ….”, गुरु जी ने अपनी बात पूर्ण की और दैनिक कार्यों में लग गए।

पर उनके शिष्य ये सब देख रहे थे और राहगीर के जाते ही उन्होंने पूछा, “क्षमा कीजियेगा गुरु जी पर आपने दोनों राहगीरों को एक ही स्थान के बारे में अलग-अलग बातें क्यों बतायी।” गुरु जी गंभीरता से बोले, “शिष्यों आमतौर पर हम चीजों को वैसे नहीं दखते जैसी वे हैं, बल्कि उन्हें हम ऐसे देखते हैं जैसे कि हम खुद हैं। हर जगह हर प्रकार के लोग होते हैं यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस तरह के लोगों को देखना चाहते हैं।” शिष्य उनके बात समझ चुके थे और आगे से उन्होंने जीवन में सिर्फ अच्छाइयों पर ही ध्यान केन्द्रित करने का निश्चय किया।

“हर एक चीज में एक खूबसूरती, एक अच्छाई होती है, लेकिन हर कोई उसे नहीं देख पाता” पैर से अपाहिज एक भिखारी सदा प्रसन्न और खुश रहता था, किसी ने पूछा : अरे भाई, तुम भिखारी हो, लंगड़े भी हो, तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है, फिर भी तुम इतने खुश रहते हो, क्या बात है ? वह बोला : बाबूजी भगवान् का शुक्र है कि में अँधा नहीं हूँ , भले ही मैं चल नहीं सकता; पर देख तो सकता हूँ, मुझे जो नहीं मिला मैं उसके लिए भगवान् से कभी शिकायत नहीं करता बल्कि जो मिला है उसके लिए धन्यवाद जरुर देता हूँ, यही हैं दुःख में से सुख खोजने कि कला… "जिस प्रकार हवा के झोंके किसी चट्टान को नहीं उखाड़ सकते, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति पर उसकी बुराई या तारीफ करना कोई असर नहीं डाल सकता"

एक नगर में एक मशहूर चित्रकार रहता था। चित्रकार ने एक बहुत सुन्दर तस्वीर बनाई और उसे नगर के चौराहे मे लगा दिया और नीचे लिख दिया कि जिस किसी को, जहाँ भी इसमें कमी नजर आये वह वहाँ निशान लगा दे। जब उसने शाम को तस्वीर देखी उसकी पूरी तस्वीर पर निशानों से ख़राब हो चुकी थी। यह देख वह बहुत दुखी हुआ। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे वह दुःखी बैठा हुआ था। तभी उसका एक मित्र वहाँ से गुजरा उसने उसके दुःखी होने का कारण पूछा तो उसने उसे पूरी घटना बताई। उसने कहा एक काम करो कल दूसरी तस्वीर बनाना और उस मे लिखना कि जिस किसी को इस तस्वीर मे जहाँ कहीं भी कोई कमी नजर आये उसे सही कर दे। उसने अगले दिन यही किया। शाम को जब उसने अपनी तस्वीर देखी तो उसने देखा की तस्वीर पर किसी ने कुछ नहीं किया। वह संसार की रीति समझ गया। "कमी निकालना, निंदा करना, बुराई करना आसान, लेकिन उन कमियों को दूर करना अत्यंत कठिन होता है

 एक नौविवाहित जोड़ा किसी किराए के घर में रहने पहुंचा। अगली सुबह, जब वे नाश्ता कर रहे थे, तभी पत्नी ने खिड़की से देखा कि सामने वाली छत पर कुछ कपड़े फैले हैं, – “ लगता है इन लोगों को कपड़े साफ़ करना भी नहीं आता …ज़रा देखो तो कितने मैले लग रहे हैं ? “ पति ने उसकी बात सुनी पर अधिक ध्यान नहीं दिया। एक -दो दिन बाद फिर उसी जगह कुछ कपड़े फैले थे। पत्नी ने उन्हें देखते ही अपनी बात दोहरा दी ….” कब सीखेंगे ये लोग की कपड़े कैसे साफ़ करते हैं …!!” पति सुनता रहा पर इस बार भी उसने कुछ नहीं कहा। पर अब तो ये आये दिन की बात हो गयी , जब भी पत्नी कपडे फैले देखती भला-बुरा कहना शुरू हो जाती। लगभग एक महीने बाद वे यूँहीं बैठ कर नाश्ता कर रहे थे। पत्नी ने हमेशा की तरह नजरें उठायीं और सामने वाली छत की तरफ देखा, ” अरे वाह, लगता है इन्हें अकल आ ही गयी…आज तो कपडे बिलकुल साफ़ दिख रहे हैं, ज़रूर किसी ने टोका होगा !” पति बोला, ”नहीं उन्हें किसी ने नहीं टोका।” “तुम्हे कैसे पता?”, पत्नी ने आश्चर्य से पूछा। “आज मैं सुबह जल्दी उठ गया था और मैंने इस खिड़की पर लगे कांच को बाहर से साफ़ कर दिया, इसलिए तुम्हे कपडे साफ़ नज़र आ रहे हैं।”, पति ने बात पूरी की। ज़िन्दगी में भी यही बात लागू होती है : बहुत बार हम दूसरों को कैसे देखते हैं ये इस पर निर्भर करता है की हम खुद अन्दर से कितने साफ़ हैं। किसी के बारे में भला-बुरा कहने से पहले अपनी मनोस्थिति देख लेनी चाहिए और खुद से पूछना चाहिए की क्या हम सामने वाले में कुछ बेहतर देखने के लिए तैयार हैं या अभी भी हमारी खिड़की गन्दी है! और आज के इस लेख का अंत मैं कबीर के इस दोहे से करना चाहूंगा: "बुरा जो देखण मैं चला, बुरा ना मिल्या कोई,जो मन खोजा आपणा, मुझसे बुरा ना कोई"


9/15/17

If You Don’t Believe In Caste, You Need To Watch This Film

Editor’s Note: As part of our coverage of PSBT’s Open Frame Film Festival And Forum 2017 that is going on in Delhi (13th – 19th September), Youth Ki Awaaz will be featuring reviews of films and interviews with directors..
Those that control the present control the past, those that control the past control the future.
-1984, George Orwell.
Gouri Patwardhan’s “In a Shadowless Town” is an absorbing 52-minute documentary revolving around the exclusivists versions of history, particularly, the case of the erasure of the Dalit Bahujan history.

What The Fundamental Right To Privacy Means For The LGBTQ Community



“Woke up on the right side of the bed today, but the government won’t know which side anymore because right to privacy.”

A friend of mine recently left this message on social media. In its dark comical tone, the post really sets things in perspective upon the sheer imperative value that the right to privacy brings into the lives of citizens. The end of August has been strongly marked by constitutional victories; the elevation of privacy to a guaranteed fundamental right is not the result of popular demand, but

9/13/17

स्टीव जॉब्स की वो बातें जो आपकी सोच बदल देगी

स्टीव जॉब्स की वो बातें जो आपकी सोच बदल देगी
  1. एक लीडर और फॉलोवर यही अंतर होता है कि लीडर हमेशा कुछ नया करता है और फॉलोवर उसकी बातों का अनुसरण करता है.
  2. सफलता मनाना अच्छी बात है लेकिन असफलताओं से सीख लेना उससे भी ज्यादा जरूरी.
  3. बहुत से काम करने से कहीं अच्छा होता है कि एक काम को बेहतरीन तरीके से किया जाए. 'ज्यादा' से 'अच्छा' बेहतर होता है. 

9/6/17

जीना इसी का नाम है :-----


एक बार पचास लोगों का ग्रुप। किसी मीटिंग में हिस्सा ले रहा था।

मीटिंग शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे कि स्पीकर अचानक



ही रुका और सभी पार्टिसिपेंट्स को गुब्बारे 🏉देते हुए बोला , ” आप

सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम लिखना है। ” सभी ने

ऐसा ही किया।

अब गुब्बारों को एक दुसरे कमरे में रख दिया गया।

स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर पांच मिनट के अंदर

अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा।

सारे पार्टिसिपेंट्स

तेजी से रूम में घुसे और पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने

लगे।

पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने नाम

वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था…

5 पांच मिनट बाद सभी को बाहर

बुला लिया गया।

स्पीकर बोला , ” अरे! क्या हुआ , आप

सभी खाली हाथ क्यों हैं ? क्या किसी को अपने नाम

वाला गुब्बारा नहीं मिला ?” ”

नहीं ! हमने बहुत ढूंढा पर

हमेशा किसी और के नाम का ही गुब्बारा हाथ आया…”, एक

पार्टिसिपेंट कुछ मायूस होते हुए बोला।

🏉“कोई बात नहीं , आप लोग एक

बार फिर कमरे में जाइये , पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले उसे

अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति को दे दे जिसका नाम उसपर

लिखा हुआ है । “, स्पीकर ने निर्दश दिया।

🏉एक बार फिर सभी पार्टिसिपेंट्स कमरे में गए, पर इस बार सब शांत थे , और कमरे

में किसी तरह की अफरा- तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने एक दुसरे

को उनके नाम के गुब्बारे दिए और तीन मिनट में ही बाहर निकले आये।

स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा ,

☝☝” बिलकुल यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है।

हर कोई अपने लिए ही जी रहा है , उसे इससे कोई

मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है , वह तो बस पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है , पर बहुत ढूंढने के बाद

भी उसे कुछ नहीं मिलता ,

👉👉 हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है।

👌👉 जब हम औरों को उनकी खुशियां देना सीख जायेंगे

👌👉तो अपने आप ही हमें हमारी खुशियां मिल जाएँगी।

✌👌 👇

और यही मानव-

जीवन का उद्देश्य भी है.....